पूर्ण विराम
सुना जब कहते हुए कि _
अर्ध विराम उनके जीवन में ,
इसकी तो कल्पना भी न थी ।
देखी जब मैं हूँ अकेली ,
गयी पास कही कानों में _
कुछ तो बोलो हो क्यों चुप ?
पर वह चुप्पी ऐसी कि ,
स्वप्न क्या तंद्रा भी टूटी ।
सारे सपने और लगी भी छूटी ,
पर मन माना न फ़िर भी ।
मन को देते हुए सांत्वना ,
बढ़ी ज्यों ही ठिठक गयी फ़िर ।
कानों को विश्वास न हुआ ,
पर क्षण भर में ही भ्रम टूटा ।
लगा पूर्ण विराम और वह छूटा ।।
- कुसुम ठाकुर -
सुना जब कहते हुए कि _
अर्ध विराम उनके जीवन में ,
इसकी तो कल्पना भी न थी ।
देखी जब मैं हूँ अकेली ,
गयी पास कही कानों में _
कुछ तो बोलो हो क्यों चुप ?
पर वह चुप्पी ऐसी कि ,
स्वप्न क्या तंद्रा भी टूटी ।
सारे सपने और लगी भी छूटी ,
पर मन माना न फ़िर भी ।
मन को देते हुए सांत्वना ,
बढ़ी ज्यों ही ठिठक गयी फ़िर ।
कानों को विश्वास न हुआ ,
सोची यह तो अर्ध विराम ।
लांघ इसे फ़िर बढ़ जाएगा ,पर क्षण भर में ही भ्रम टूटा ।
लगा पूर्ण विराम और वह छूटा ।।
- कुसुम ठाकुर -
