मेरा १०० वाँ पोस्ट

(मेरा १०० वाँ पोस्ट मेरे उस साथी को समर्पित जिसने मुझ पर विश्वास किया ।)

"जीवन तो है क्षण भंगुर"

बिछड़ कर ही समझ आता,
क्या है मोल साथी का ।

जब तक साथ रहे उसका,
क्यों अनमोल न उसे समझें ।

अच्छाइयाँ अगर धर्म है,
क्यों गल्तियों पर उठे उँगली ।

सराहने मे अहँ आड़े,
अनिच्छा क्यों सुझाएँ हम ।

ज्यों अहँ को गहन न होने दें,
तो परिलक्षित होवे क्यों ।

क्यों साथी के हर एक इच्छा,
को मृदुल-इच्छा न समझे हम ।

सामंजस्य की कमी जो नहीं,
कटुता का स्थान भी न हो ।

कहने को नेह बहुत,
तो फ़िर क्यों न वारे हम ।

खुशियों को सहेजें तो,
आपस का नेह अक्षुण क्यों न हो ।

दुःख भी तो रहे न सदा,
आपस में न बाटें क्यों ।

जो समर्पण को लगा लें गले,
क्यों अधिकार न त्यागे हम ।

यह जीवन तो है क्षण भंगुर,
विषादों तले गँवाएँ क्यों ।।

-कुसुम ठाकुर -

31 comments:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

सबसे पहले सौवें पोस्ट के लिए ढेरों बधाई,
जीवन की गहराइयों को आपने कारे अक्षर में समेट दिया है,
भावपूर्ण कविता के लिए एक और बधाई स्वीकारिये.

जी.के. अवधिया said...

100वें पोस्ट की बधाई!

ललित शर्मा said...

सौवीं पोस्ट के लिए शुभकामनाएं, आपने अपने अनुभवो एवं विचारों को सहेज कर आने वाली पीढी के मार्गदर्शन का महती कार्य किया है पुनश्च शुभकामनाएं,

महफूज़ अली said...

सौवीं पोस्ट के लिए शुभकामनाएं.........

संगीता पुरी said...

सबसे पहले तो सौवीं पोस्‍ट के लिए बधाई .. उसके बाद इतनी गंभीरता भरी रचना के लिए आपका धन्‍यवाद !!

M VERMA said...

भावपूर्ण और अत्यंत सुन्दर 100वे पोस्ट के लिये हार्दिक बधाई
सफ़र जारी रहे

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सौवीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई!

गिरिजेश राव said...

आनन्द प्राप्त भए।
बधाइयाँ।
रचते रहिए।

cmpershad said...

बधाई.... अब हज़ारवीं पोस्ट की ओर बढ़ें:)

rashmi ravija said...

congratulations!!..on this great achievement...wish u all the best for forthcoming posts...liked this poem very much..

Udan Tashtari said...

शतकीय पोस्ट की अनेक बधाई...बहुत शुभकामनाएँ.

समर्पण को लगा लें गले, क्यों अधिकार न त्याजे हम ।
यह जीवन तो क्षण भंगुर, विषादों तले गँवाएँ क्यों ।।

-सुन्दर रचना!!

आमीन said...

जीवन तो क्षण भंगुर, विषादों तले गँवाएँ क्यों ।।

wah

tulsibhai said...

" 100 vi post ke liye aur is behtarin post ke liye aapko badhai "

---eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

AlbelaKhatri.com said...

bahut bahut abhinandan !

kusum ji

bahut bahut badhaai aapko.........


aapki souvin post par sou sou baar saikdon shubhkaamnaayen.....


kuchh bachaali hain aapki agli century ke liye..........

महेन्द्र मिश्र said...

१०० वी पोस्ट के लिए बधाई हजारो लिखे.. शुभकामनाओ के साथ.

डॉo कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

jaldi hi is 100 ko 1000 men badlen, BADHAAAAIIIIIII dheron dher

Anonymous said...

आपके १००वे पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई.आपकी रचनायें बहुत ही भावनात्मक और मार्मिक होती हैं साथ ही साथ आपका अतीत भी झलकता है और किसी करीबी के प्रति आपका प्रेम और समर्पण कबीले तारीफ है.यह रचना भी अन्य सभी की तरह बहुत ही सुंदर है

Mithilesh dubey said...

आपको बहुत-बहुत-बहुत-बहुत बधाई १०० पोस्ट के लिए। इस मौके पर आपकी रचना लाजवाब रही।

रंजना said...

Kitna sahi kaha aapne......jab tak saathi saath hota hai,ham aham ko bhi parshv me bithaye rakhte hain aur prem nyochhvar karne ka suawsar kho dete hain....Bahut hi prernaprad sundar rachna...

Shatak ke liye bahut bahut badhai...

अनूप शुक्ल said...

बधाई!

sada said...

सबसे पहले तो मेरे ब्‍लाग पर आने के लिये आभार, एक शतक पूरा हुआ, जिसके लिये बधाई एवं शुभकामनायें भावमय सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

pallavi trivedi said...

अच्छी रचना है...आपकी सौवी पोस्ट के लिए बधाई !

नीरज गोस्वामी said...

यह जीवन तो क्षण भंगुर, विषादों तले गँवाएँ क्यों ।।

वाह वाह...कितनी अच्छी बात कही है आपने...काश इस बात को हम समझ लें तो जीवन सुखमय हो जाये...
नीरज

Kusum Thakur said...

आप सभी स्नेही जनों को उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

aarkay said...

hamne to abhi shuruaat bhi nahin ki. aapko shatakiya paari ke liye badhai

Mired Mirage said...

सौंवी पोस्ट के लिए बधाई।
सही बात कही है।
घुघूती बासूती

Mired Mirage said...

सौंवी पोस्ट के लिए बधाई।
सही बात कही है।
घुघूती बासूती

POTPOURRI said...

सौवें पोस्ट के लिए ढेरों बधाई!! aapki kavita jeevan ii satyata ko darshati hai. jaha prem hai vaha samrpan bhi hai.

श्यामल सुमन said...

हार्दिक बधाई एवं शुभकामना कुसुम जी। आपने सचमुच इन दिनों काफी मेहनत किया है लेखन के क्षेत्र में जिसका परिणाम सामने है। लेकिन यह हजारवीं पोस्ट तक जाय और यात्रा उसके भी आगे निकले पुनश्च यही शुभकामना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

dr. ashok priyaranjan said...

बेहतरीन रचना
maine apney blog pr ek lekh likha hai- gharelu hinsa-samay mile to padhein aur comment bhi dein-

http://www.ashokvichar.blogspot.com


मेरी कविताओं पर भी आपकी राय अपेक्षित है। यदि संभव हो तो पढ़ें-

http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

Sambhav said...

अक्सर लोगा कुछ पोस्ट के बाद पैक अप कर देते हैं. ऐसे में 100 पोस्ट. आशा है, तेंदुलकर की तरह सेंचुरी पर सेंचुरी होती जायें.