हाइकु

" हाइकु " 

सुख औ दुःख 
जीवन के दो पाट 
तो गम कैसा 

चलते रहो 
हौसला ना हो कम 
दूरियाँ क्या है 

लक्ष्य जो करो 
ज्यों ध्यान तुम धरो 
मिलता फल 

हार ना मानो 
ज्यों सतत प्रयास 
मंजिल पाओ 

कर्म ही पूजा 
उस सम ना दूजा 
कहो उल्लास 

ध्यान धरो 
बस मौन ही रहो 
पाओ उल्लास 

- कुसुम ठाकुर -

11 comments:

RAJESHWAR VASHISTHA said...

बहुत सुन्दर रचनाएं.....

anuradha srivastav said...

गागर में सागर भरना इसे ही कहते हैं ........

Pawan Kumar said...

यह हायकू खूब जमा
चलते रहो
हौसला ना हो कम
दुरियाँ क्या है
5-7-5 के फोर्मेट में बहुत करीने से बात कह डाली आपने...बधाई.

मनोज कुमार said...

एक-एक हाइकु जीवन जीने का मंत्र है।

vandan gupta said...

जीवन को दिशा देनी हो तो ये पढना चाहिये…………बहुत ही सुन्दर्।

Unknown said...

…बहुत ही सुन्दर्.

बधाई.

Parul kanani said...

kusum ji...g8 job! :)

Shayar Ashok : Assistant manager (Central Bank) said...

हार ना मानो
ज्यों सतत प्रयास
मंजिल पाओ

कर्म ही पूजा
उस सम ना दूजा
कहो उल्लास

बिल्कुल सच्ची और अच्छी बातें ...
बहुत खूब ||

Suman Jha said...

great poem!

Urmi said...

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है ! उम्दा प्रस्तुती!

Kusum Thakur said...

सभी ब्लॉगर साथियों का उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद !!