मन को समझाती रही !!

मन को समझाती रही "

यूँ गए कि  फिर न आए मन को समझाती रही 
बागबाँ बन अपने सूने मन को भरमाती रही 

शोख चंचल भावना हो पर फ़रह मुमकिन कहाँ 
सपनों मे थी कुछ संजोई सोच मुस्काती रही 

इब्तिदा जो प्यार की अलफ़ाज़ से मुमकिन नहीं  
दिल के हर एहसास का मैं गीत दुहराती रही 

चंद लम्हों का ये जीवन कुछ भला मैं भी करूँ  
कोशिशें हर पल करूँ और गम को बहलाती रही

आरज़ू थी कुछ कुसुम की अश्क शब्दों में ढले
काश मिल जाए वो खुशियाँ मन को झुठलाती रही 

- कुसुम ठाकुर -


शब्दार्थ :
फ़रह - प्रसन्नता, ख़ुशी 
इब्तिदा - शुरू , प्रारंभ 
अलफ़ाज़ - शब्द समूह 
अश्क - आंसू 



27 comments:

Jandunia said...

शानदार पोस्ट

Unknown said...

बहुत खूब, शानदार.
इस बेहतरीन लेखनी के लिए बधाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल

सुधीर राघव said...

bahut khoob.

पॉल बाबा का रहस्य आप भी जानें
http://sudhirraghav.blogspot.com/

वन्दना अवस्थी दुबे said...

चंद लम्हों का यह जीवन कुछ भला मैं भी करूँ
कोशिशें हर पल करूँ और गम को बहलाती रही
बहुत सुन्दर.

Udan Tashtari said...

बेहतरीन रचना!!

Mahfooz Ali said...

उर्दू के लफ़्ज़ों को बहुत खूबसूरती से दर्शा के एक बहुत मुकम्मल ग़ज़ल है ....

दीपक 'मशाल' said...

beautiful gazal.. जन्मदिन मुबारक हो मैम..

राजकुमार सोनी said...

भाषा पर बहुत अच्छी पकड़
रचना तो शानदार है ही
बधाई आपको

राजकुमार सोनी said...

जन्मदिन की भी शुभकामनाएं.

सूर्य गोयल said...

मन में उठने वाले भावो को जिस खूबसूरती से आपने शब्दों में पिरो कर कविता की रचना की है उसके लिए मेरी बधाई स्वीकार करे. बहुत ही सुन्दर रचना.

ब्लागर साथियों को जन्मदिन की तहेदिल से बहुत-बहुत शुभकामनाये.

पग-पग में फुल खिले,
ख़ुशी आपको इतनी मिले,
कभी न हो दुखो से सामना,
यही है मेरी शुभकामना.

कभी फुर्सत से मेरी गुफ्तगू में शामिल हो कर मेरा हौसला बढ़ाये. www.gooftgu.blogspot.com

vandan gupta said...

उफ़ ………………
सारे दर्द को शब्दो मे लुटाती रही
पर उफ़ ना लबों पर लाती रही
मै हंसती रही मुस्कुराती रही
ज़िन्दगी को जश्न सा मनाती रही

राजेश उत्‍साही said...

कुसुम जी यह अहसास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। आपको जन्‍मदिन मुबारक हो और आने वाला महत्‍वपूर्ण दिन भी।

Mithilesh dubey said...

बहुत खूब, शानदार.
इस बेहतरीन लेखनी के लिए बधाई

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut sundar gazal

janmdin ki bahut bahut badhai
evam shubh-kaamnaayen

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

श्यामल सुमन said...

भावनायें शब्द के संग मन की बातें कह गयीं
और कुसुम खुद का ही जीवन खुद से सुलझाती रही

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 13 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

अविनाश वाचस्पति said...

शब्‍दों में भावों को आपने लुटा दिया

पर फिर भी एक खजाना पा लिया।

वाणी गीत said...

यही तो अमर प्रेम है ...
यह कविता पढने के बाद आपकी इस कविता को और भी अच्छी तरह समझ पायी , जुड़ गयी ..

यूँ गए कि फिर न आए मन को समझाती रही
बागबाँ बन अपने सूने मन को भरमाती रही
कोई नजरों से ही दूर हो तो फिर भी उसके आने की आस रहती है ...मगर जो दिल में बसा हो वह तो कभी दूर गया ही नहीं ..फिर मन सूना क्यों ...शायद सिर्फ कहना ही आसान है ...इस सूनेपन को सूना दिल ही समझ सकता है ...
मन को भीतर तक छू गयी ...
सुन्दर ...!

girish pankaj said...

dil ko chhone vali kavitaa. badhai.

रचना दीक्षित said...

आरज़ू थी कुछ कुसुम की अश्क शब्दों में ढले
काश मिल जाए वो खुशियाँ मन को झुठलाती रही

वाह !!!!क्या कितना खुबसूरत है ये मन कभी अनजान कभी जाना पहचाना है ये मन

Kusum Thakur said...

आप सभी मित्रों का स्नेह देख मैं भाव विभोर हो गयी......शब्दों में बयां करना नामुमकिन है !!

Pawan Kumar said...

नीरज जी के ब्लॉग के बाद सीधे आपका ब्लॉग विसित किया....तो लगा की जैसे एक ही सिलसिले में आगे बढ़ आये हैं....ग़ज़ल अच्छी है ये दो शेर तो चुरा लेने का जी कर रहा है......

इब्तिदा जो प्यार की अलफ़ाज़ से मुमकिन नहीं
दिल के हर एहसास का मैं गीत दुहराती रही

चंद लम्हों का ये जीवन कुछ भला मैं भी करूँ
कोशिशें हर पल करूँ और गम को बहलाती रही

divya naramada said...

shandaar aur jaandaar... badhaee.

ghughutibasuti said...

बहुत सुन्दर !
घुघूती बासूती

Shayar Ashok : Assistant manager (Central Bank) said...

चंद लम्हों का ये जीवन कुछ भला मैं भी करूँ
कोशिशें हर पल करूँ और गम को बहलाती रही

आरज़ू थी कुछ कुसुम की अश्क शब्दों में ढले
काश मिल जाए वो खुशियाँ मन को झुठलाती रही


waah .........dil khush ho gaya , kamaal ke sher hain

Prabha said...

Read many of your blogs today and Didi I am seriously impressed.
Wonderful - bahut kuch hai aapse sunne aur seekhne ko aisa mahsus hota hai aur jitna padhu aage aur padhne ka bhi man hota hai.