चलने का नाम ही जीवन है .

 " चलने का नाम ही जीवन है "

गैरों से उम्मीद नहीं थी, अपनो ने जख्म दिया मुझको ।
चाहत कैसी तलबगार की, नेह सुधा न मिला मुझको ।।

सुख दुःख की आँख मिचौनी भी, शिरोधार्य किया मैंने ।
जीवन की हर सच्चाई से , साक्षात्कार न हुआ मुझको।।

चलने का नाम ही जीवन है, बस उसका अलख जगा बैठे ।
छोर निकट आया मंजिल की, ना आभास हुआ मुझको ।।

सिद्धांत कभी जो मन में बसा, उसे आज निभाना कठिन सही
क्या मार्ग उचित है, प्रगति भी हो, या यूँ ही भरमाया मुझको।।

है कुसुम नाम उत्सर्गों का , रहे उचित ध्यान सत्कर्मों से ।
कामना करूँ हर पल उससे , अभिमान कभी न छुए मन को ।।

- कुसुम ठाकुर -

9 comments:

सूर्यकान्त गुप्ता said...

कामना करूँ हर पल उससे , अभिमान न कभी छुए मन को ।। यह पंक्ति सभी के लिये अनुकरणीय।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

बहुत खूब, सुन्दर प्रस्तुति.
आभार

Shayar Ashok said...

है कुसुम नाम उत्सर्गों का , रहे उचित ध्यान सत्कर्मों से ।
कामना करूँ हर पल उससे , अभिमान न कभी छुए मन को ।।


aapki post buzz per her baar padha kerta tha , aaj blog pe aane ka saubhagay praapt hua.......


bahut sundar bhav, umda lekhan...

Kusum Thakur said...

आप सभी का आभार !!

girish pankaj said...

kavitaa likhanaa sadhana-path par chlanaa hai. aap chal rahi hai. sahitya ki bagiyaa mey aap suvasit-kusum ki tarah mahke, yahi shubhkamanaa hai.

वाणी गीत said...

चलना ही जीवन है ...चलते जाना रे ...

सुन्दर ..!

ana said...

shabda chayan bahut achchha...........aage bhi aana hoga

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....बहुत सार्थक अलख जगाया है

ryo jeo said...

i am visit here.. :)