जुस्तज़ू

"जुस्तज़ू "

प्यार मैं जो करूँ क्यों बगावत करूँ
कैसे अब मैं न उसकी इबादत करूँ

क्या खता थी मेरी मुझे नहीं है पता
किससे शिकवा करूँ क्या शिकायत करूँ

लब सिले हैं मेरे पर पशेमाँ भी हैं
कैसे इज़हार करूँ न अनायत करूँ

जुस्तज़ू थी मेरी जो मुझे मिल गई
इक कशक आबरू की हिफाज़त करूँ

सब कुसुम सा खिले मुस्कुराए दुनिया में
किसी को भला क्यों मैं आहत करूँ

- कुसुम ठाकुर -

22 comments:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

बहुत बढ़िया,
सम्पूर्ण भाव को समेटा है.
बधाई स्वीकारिये

श्यामल सुमन said...

लब सिले हैं मेरे पर पशेमाँ भी हैं
कैसे इज़हार करूँ न शिकायत करूँ

हृदय की बेचैनी साफ साफ झलक रही है इस शेर में। बहुत सुन्दर भाव की पंक्तियाँ कुसुम जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

विनोद कुमार पांडेय said...

क्या खता थी मेरी मुझे नहीं है पता
किससे शिकवा करूँ क्या शिकायत करूँ

सुंदर मन के सुंदर भावों को व्यक्त करती बहुत बढ़िया ग़ज़ल..बधाई

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर!!

Udan Tashtari said...

बेहतरीन..पसंद आई!!

AlbelaKhatri.com said...

अच्छी कविता..........
बधाई !

मनोज कुमार said...

जुस्तज़ू थी मेरी जो मुझे मिल गई
इक कसक आबरू की हिफाज़त करूँ
बहुत अच्छे भाव।

वाणी गीत said...

प्यार करूँ तो कैसे इजहार ना करू ...कैसे शिकायत ना करू ...
बहुत खूब ...क्यों ना करे ...!!

shashank said...

it is a beautiful & meaningful poem . thanx

Mithilesh dubey said...

बेहद उम्दा व लाजवाब रचना । बहुत-बहुत बधाई आपको

ललित शर्मा said...

सब कुसुम सा खिले मुस्कुराए दुनिया में
किसी को भला मैं आहत क्यों करूँ,
बहुत सुंदर भाव है। आभार

योगेन्द्र मौदगिल said...

huuum....achhi rachna...

निर्मला कपिला said...

लब सिले हैं मेरे पर पशेमाँ भी हैं
कैसे इज़हार करूँ न शिकायत करू
बहुत सुन्दर रचना है बधाई

Kusum Thakur said...

आप सबों का उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

sada said...

हर शब्‍द एक गहराई लिये हुये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

रंजना said...

Komal bhavon ki atisundar mugdhkari abhivyakti.....

Bahut bhut bhut hi sundar rachnaa...man harshit ho gaya padhkar..aabhaar...

गौतम राजरिशी said...

अच्छी रचना दी!

संजय भास्कर said...

बेहतरीन..पसंद आई!!

संजय भास्कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

श्याम कोरी 'उदय' said...

सब कुसुम सा खिले मुस्कुराए दुनिया में
किसी को भला मैं आहत क्यों करूँ
... बहुत खूब, प्रसंशनीय !!!!

Kusum Thakur said...

आप सभी को उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

Dr Shamsul hoda said...

bahut khub... ur words penetrate deep...