मूल्य है हर पल का



"मूल्य है हर पल का"


मूल्य है हर उस पल का ,
चाहे सुख या दुःख के हों ।
दुःख की घड़ियाँ न रहे सब दिन ,
तो सुख की आस निरंतर क्यों हो ।


जो दुःख की घड़ियाँ सहज सँग हो ,
तो सुख बाँटन में भी सुख हो ।
जो मिल जाए, और विश्वास सँग हो ,
तो सुख और दुःख में भेद कम हो ।


सुख में उल्लास बढे विश्वास ,
दुःख में ही पहचान भी तो हो ।
आवे न जो दुःख, इस जीवन में ,
तो सुख का मोल, भी तो कम हो ।।

- कुसुम ठाकुर -


13 comments:

महफूज़ अली said...

बहुत सुंदर रचना....

आभार.......

Suman said...

nice

श्यामल सुमन said...

सुख दुख जीवन संगिनी पर दुख में पहचान।
सुख में खोये जो कभी जीवन से अनजान।।

सुन्दर भाव।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

MUFLIS said...

दुःख की घड़ियाँ न रहे सब दिन ,
तो सुख की आस निरंतर क्यों हो ।

jeevan-darshan ki prasaangiktaa ko
khoob shabdon mei dhaal kar
ek achhee kavita ka nirmaan...
bahut behtar srijan ..

महेन्द्र मिश्र said...

बढ़िया रचना प्रस्तुति....

ललित शर्मा said...

आवे न जो दुःख, इस जीवन में ,
तो सुख का मोल, भी तो कम हो ।।
सुख की पहचान दु:ख मिलने पर ही होती है। बहुत बढिया कविता- आभार

मनोज कुमार said...

रचना अच्छी लगी ।

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया रचना!

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई।

AlbelaKhatri.com said...

badhiya rachnaa...

pathneeya bhi sangrahneeya bhi...

abhinandan !

नीरज गोस्वामी said...

जो दुःख की घड़ियाँ सहज सँग हो ,
तो सुख बाँटन में भी सुख हो ।

सुन्दर शब्द और भाव लिए आपकी ये रचना अनुपम है...
नीरज

Kusum Thakur said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद !!

गौतम राजरिशी said...

"जो दुःख की घड़ियाँ सहज सँग हो ,
तो सुख बाँटन में भी सुख हो"

सहज लय-प्रवाह लिये गुनगुनाने वाली रचना।