आई पी address पुलिस में देने की धमकी !!

वैसे तो मैं १९९६ से कंप्यूटर का प्रयोग कर रही हूँ और १९९९ से पूरे तौर पर इन्टरनेट और ईमेल से जुड़ी, पर ब्लॉग की दुनिया से जुड़े हुए मुझे दो साल और तीन महीने ही हुए हैं . यों तो लिखने पढ़ने का शौक पहले से ही था , या कह सकती हूँ कि मैं उसी माहौल का हिस्सा दशकों से थी . अतः  लेखन पाठन मेरे शौक का हिस्सा कब बना नहीं कह सकती . पर ब्लॉग न ही पढ़ती थी और न ही उसके बारे में ज्यादा कुछ मालूम ही था . वह तो २००८ में जब मैं बेटे के पास कैलिफोर्निया आई उस समय श्वेता, (बड़ी बहु) के कहने पर ब्लॉग लिखना शुरू की . शुरुआत तो की थी अपनी यात्रा से वह भी अंग्रेजी में . धीरे धीरे भिन्न भिन्न विषयों पर लिखने लगी और अलग अलग कई ब्लॉग बना ली . एक मित्र के कहने पर हिन्दी में भी लिखना शुरू कर दी . कभी कभी अपनी पोस्ट पर टिप्पणी देखती और यदि लिंक छोड़ा हुआ होता तो उत्सुकतावश उनके ब्लॉग पर जाती और उसे पढ़ती थी . कभी कभी औपचारिकतावश और कभी कभी मन को भा जाता तब भी, टिप्पणी देने लगी.  उस समय मुझे यह नहीं पता था ब्लॉग और ब्लॉगर की भी अपनी अलग दुनिया होती है . आम परिवार और समाज की तरह यहाँ भी लोग एक दूसरे से मिलते हैं उनके सुख दुःख में हिस्सा लेते हैं मित्रता के दायरे बढ़ाते हैं . साथ ही आम परिवार और समाज की तरह यहाँ भी आपस में नोक झोंक , सहृदयता और द्वेष की भावना विधमान है , जो कि एक समाज परिवार के लिए स्वाभाविक होता है . मैं भी इस परिवार समाज का हिस्सा कब बन गई मालूम नहीं . बहुत से खट्टे मीठे अनुभव हुए इस परिवार से जुड़ने के बाद . कई बहुत ही अच्छे मित्र बने पर स्वभावतः मैं विवादों से दूर रहने की कोशिश करती और अब भी करती हूँ . मुझे विवाद और राजनीति यह दोनों बिल्कुल ही पसंद नहीं है . मैं कर्म में विश्वास रखती हूँ और मेरी बातों से या किसी तरह के व्यवहार से किसी को ठेस न पहुँचे यह सदा प्रयास करती हूँ . 

इस बीच बराबर सुनने में आता है किसी का मेल a/c hack हो गया तो किसी का फेस बुक a/c . दो दिनों पहले मेरे एक मित्र का g mail a/c ही hack हो गया . बहुत ही परेशान था, उसके कई ब्लॉग हैं वह उनसब पर लॉग इन नहीं हो सकता . उसने कई जरूरी आंकड़े भी अपने IN BOX  में रखे थे ....जिसे खोने का उसे काफी दुःख था. मैं भी चिंतित थी और उसी को ध्यान में रख मैं अपने सारे e mail a/c के पास वर्ड बदलने की सोची . इसी सिलसिले में मैं अपने याहू a/c पर गई .  पर वहाँ मेरे नाम से कोई पहले से ही लॉग इन था . मेरी समझ में यह नहीं आया ऐसा  भी हो सकता है . पहले तो मैं याद करने की कोशिश की , कहीं कोई कुसुम ठाकुर मेरे मित्र सूची में तो नहीं . पर वह अगर होता तो अवश्य याद रहता . अपने नाम के मित्र को कैसे भूल सकती हूँ . 

मुझे जब कुछ समझ में नहीं आया तो मैं उसे एक मैसेज भेजी .....आप कौन हैं, जरा अपने बारे में बताएँगे ? उधर से जवाब आया "मैं कोई हूँ.....आप कौन हैं "? मैं तुरन्त जवाब दी मेरा नाम कुसुम ठाकुर है, मैं एक ब्लॉगर हूँ पर आप भी इसी नाम से लोग इन हैं . मुझे लगा एक व्यक्ति जो इन्टरनेट का प्रयोग करता है या उससे जुड़ा हुआ है उसके लिए ब्लॉग का परिचय देना ही उचित होगा . ताकि वह ब्लॉग पर जाकर मेरा परिचय देख पूरी तरह से वाकिफ हो सकता है और जो भी प्रश्न चाहे पूछ सकता है . उन्होंने कहा अपने ब्लॉग का url दें . मैंने कहा ....मेरे ब्लॉग का नाम "Kusum's journey"  है पर आप मेरे उत्सुकता का निवारण पहले करें . यह सुनते ही उस सज्जन को मालूम नहीं क्या लगा तुरन्त ही मैसेज किया " I work with police and I am giving your IP address to the police." मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया . पर जो कभी कुछ गलत काम नहीं करता उसे आत्म विश्वास की कमी नहीं होती . मैंने भी धैर्य के साथ उसे कहा "I also know police as well as google and yahoo first you enquire about me and if you feel give my IP Address to the police". इसके बाद मैं उन्हें किसी भी तरह का मैसेज नहीं भेजी और जुट गई यह ढूँढने में यह महानुभाव हैं कौन .

 बहुत खोज बीन के बाद पता चला उस व्यक्ति का mail ID अनूप भार्गव नाम से था . तब मेरी शंका और बढ़ गई पर यह कैसे हुआ मेरी समझ में नहीं आया . याहू पर मैं बहुत ही कम जाती हूँ और जहाँ मेल ID देना जरूरी होता है वहाँ yahoo ID का ही प्रयोग करती हूँ . हाँ एक और ब्लॉगर साथी के कहने पर मैंने एक बार ई कविता की सदस्य बन गई थी पर मात्र एक बार ही उसमे कविता भेजी थी और साथियों ने सुझाव भी भेजा था . जिसके लिए मैं उन साथियों का शुक्रगुजार हूँ. अब मैं ऑनलाइन ढूँढने लगी कहीं कोई अनूप भार्गव के नाम से मिले .....एक व्यक्ति मिले भी जो शायद लिखते भी हैं और उनका ब्लॉग भी देखी  ...और अभी अमेरिका में जहाँ मैं हूँ,  वहाँ से पास ही रहते है . पर मेरा मन नहीं माना... एक सभ्य व्यक्ति परिचय पूछने पर सीधा पुलिस की धमकी देगा ...मैंने तो उन्हें मेरे बारे में जानने के सुराग भी दी थी . उन्होंने तो सीधा बस पुलिस की ही धमकी दे डाली . सबसे पहले मैं उनके नाम को अपने संपर्क सूची (contact list) से हटा दी . संयोग वश एक दो साथी ब्लॉगर ऑन लाइन दिखे उनसे उन सज्जन के विषय में पूछी पर किसी ने उनके बारे में कुछ नहीं बताया ,बल्कि वे उस नाम को जानते ही नहीं थे . खैर, संयोग वश एक ब्लॉगर साथी से बातें हो रही थी और उन्होंने कहा हाँ वे उन्हें जानते हैं और अनूप जी सज्जन भी हैं . सज्जनता की यदि यही परिभाषा है तो शायद मैं उसकी परिभाषा ही नहीं जानती . क्या सज्जन इसे ही कहते हैं ? क्या सज्जन व्यक्ति की नज़रों में दूसरे सभी दुर्जन हैं ? यह कैसे कोई आंक लेता है कि सामने वाला व्यक्ति कमजोर है और धमकी से डर जाएगा ? 

25 comments:

Pankaj Trivedi said...

कुसुमजी,
आई पी एड्रेस पुलिस में देने की धमकी - पूरा आलेख पढ़ा | मेरा पहला ब्लॉग और ईमेल आई डी किसी ने हेक कर दिया था |
मगर ये रो सरासर गलत आदमी है, जो पुलिस के नाम धमकी देता है | मतलब की वो खुद डरपोक है | जो जूठ करता है, वह दरकार हमें पुलिस की धमकी दें, विकृत मानसिकता का परिचय है | फेसबुक पर किसी संजीव वर्मा ने मेरी कविता उठा ली तो भी हंगामा हुआ | काफी लोगोने उन्हें नीकाल दिया | वो बेशर्मी से कहता था कि कांग्रेसी हूँ | फिर तो माफी मंगनी पडी |
ये अनूप कोइ डमी ही होगा | मुझे तो वो भी सच नहीं लगता | ऐसे लोगों से कॉपी राईट के तहत बाकायदा कार्यवाही करनी चाहिए | हम आपके साथ है, हर पल....

AlbelaKhatri.com said...

afsosjanak !

दीपक 'मशाल' said...

mujhe bhi yahi lagta hai ki us badmaash ne Anoop Bhargav ka account bhi hack kar rakha hoga..
आपकी पोस्ट को ४-९-१० के चर्चा मंच पर सहेजा है.. आके देखेंगे क्या?

Kusum Thakur said...

दीपक जी,....मैं अवश्य ही चर्चा मच पर आउंगी और देखूंगी !!

Udan Tashtari said...

कोई बड़ा कन्फ्यूजन लगता है. आप अनूप जी से संपर्क करें, वह जरुर समस्या निवारण का प्रयास करेंगे.

ललित शर्मा-ললিত শর্মা said...

पासवर्ड हैक करने के वर्तमान में कई मामले सामने आ रहे हैं। जब तक किसी के खिलाफ़ माकूल कार्यवाही नहीं होगी, तब तक ये चेतने वाले नहीं है।
पता नहीं ये सब करके इन्हे क्या मिलता है?
यह निंदनीय कृत्य है।

Akhtar Khan Akela said...

bhn kusum ji ghbraane ki zrurt nhin aese sbhi logon ke liyen cybr qaanun he cybr visheshgy sb dhundh nikalenge or fir agr aap muqdma drj kraana chahogi to yeh jnab gye 5 saal ke liyen km se km lakhon ka jurmana alg se hogaa. akhtar khan akela kota rajsthan

राजभाषा हिंदी said...

ओह! ये तो बड़ा खतरनाक मामला है।

हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

ताऊ रामपुरिया said...

अगर अनूप झी ने ऐसा किया है तो गलत है पर अनूप जी मुझे ऐसे इंसान नही लगते हैं.

रामराम.

वन्दना said...

आप सबके सुझाव मानते हुये इस मामले को गंभीरता से लें और दोषी के खिलाफ़ उचित कार्यवाही करें।

अनूप भार्गव said...

कुसुम जी:
समीर लाल जी का धन्यवाद कि उन्होनें इस पोस्ट की ओर मेरा ध्यान दिलाया वरना मैं इसे पढता ही नहीं । आप को मेरी शिष्टता और सज्जनता पर निर्णय लेने का पूरा अधिकार है और मैं उसे छीनना नहीं चाहता लेकिन वाकया कुछ यूँ हुआ था ।
मैं अपने एकमात्र याहू आई डी (जिस का मैं पिछले १८ वर्षों से प्रयोग कर रहा हूँ) पर Login हूँ । एक अनजान व्यक्ति जिसे मैं नहीं जानता मुझ से आ कर पूछता है Who Are you. यह कुछ ऐसे हुआ कि कोई मेरे दरवाजे पर आ कर खटखटाये और मुझे से पूछे कि मैं कौन हूँ ?

मेरा जवाब था "who are you and how do I know you?

Your answer was I am Kusum Thakur but first you tell me about yourself.

I still don't know you at this point so I am not willing to disclose any details about myself.

You insist on asking details about myself.

I said I need to know who you are because you knocked at my door , I didn't.

This is equivalent of me refusing to open my door as I still don't know you.

You said you are a blogger.
I asked you your URL
You gave me your blog name. (Kusum's Journey)
I have no easy way to find your blog and frankly I don't have time to do that. If you would have given me the URL, it would have been lot easier.

I asked you again "how do you know me" and you refused to answer that.
At that time I got irritated and thought that some hacker is using your identity and trying to get information from me.

I use the threat of reporting to police to scare the hacker.
------------------

I will neither try to justify my behavior nor I would apologize. I do get such hackers trying to talk to me in the name of someone else at least 1-2 times every month.

अगर आप ईकविता की सदस्या हैं तो आप यह बात शुरु में ही कह सकती थी । ईकविता के करीब ७०० सदस्य हैं और मैंने कभी किसी सदस्य से बात करने को इंकार नहीं किया ।
आप मुझ से बात करना चाहें तो मेरे फ़ोन नम्बर आप ’नेट’ पर से पता कर सकती है ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

पिछले कुछ दिनों से इस प्रकार की कईं घटनाएं सुनने को मिली है.....खैर अनूप भार्गव जी ने स्पष्ट कर ही दिया कि ये सब कन्फयूजन की वजह से हुआ...

sonal said...

bahut hi dukhdaayak..
mere husband ki id bhi kisi ne hack kar li thi, jiski wajah se ab wo log in nahi kar paate.. ye bahut galat baat hai ki kisi ka id hack kar lena.. very sad.....

A Silent Silence : Mout humse maang rahi zindgi..(मौत हमसे मांग रही जिंदगी..)

Banned Area News : Book on 'secret lovers' of Carla Bruni set to release in France

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अरे बाप रे, ऐसा भी हो सकता है सोचा नहीं था।
………….
जिनके आने से बढ़ गई रौनक..
...एक बार फिरसे आभार व्यक्त करता हूँ।

PN Subramanian said...

चोरी और सीना जोरी! हाँ यदि आपका hotmail अकाउंट है तो सावधान हो जाएँ. आजकल hotmail टीम की ओर से मेल भेजे जा रहे हैं और हमसे हमारी निजी जानकारी भी. हरगिज न दें.

मानसी said...

कुसुम जी, एक बार यह पोस्ट लिखने से पहले थोड़ी पूछताछ तो कर लेतीं कि अनूप भार्गव हैं कौन। और आप ही के नाम से किसी ने log in किया था, आप खुद से चैट कर रहीं थीं? ...या अनूप भार्गव ही logged in थे...बात कुछ ठीक से समझ नहीं आई। खैर, जो कुछ भी है, इस तरह के आरोपों वाले पोस्ट लिखने से पहले थोड़ी जाँच पड़ताल कर लेना आवश्यक होता है। और अन्य ब्लागर साथीगण, कृपया सिर्फ़ टिप्पणी देने के लिये टिप्पणी न दें।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

उक्त सज्जन ने जिन्होंने पुलिस का धमकी दिया चेत जाएँ, क्यूंकि अपने नाम को बदल कर महिला नाम रख कर ये अनूप भार्गव ने साफ़ जाहिर किया की फर्जियाना तरीका अपनाने वाला ये सख्सियत ही फर्जी और आपराधिक छवि का लग रहा है, जांच परताल कर इसकी पोल भड़ास पर खोलता हूँ.

Vivek Rastogi said...

कुछ ज्यादा ही गड़बड़ और भ्रम की स्थिती है...

Anonymous said...

Anup Bhargav ke comment aapko har nayi mahila blogers ke blog par mil jayege. Jab inhe apni original ID se mahila blogger ka respose nahi milta to yeh apni fake IDs se intimate hone ki koshish karte hai. Es bat ko lagbhag sabhi blogger jante hai. Aap ese ignore kare. Apki blogging ke liye yahi behtar hai. Aap enke khilaph jayegi to aapka haal bhi Divyaji jaisa hoga. Agar aap apne blog ko popular karna chahti hai to Ada ko follow kijiye (wahi apni 5-5 million dollar ke project wali) Unke blog par aap galiya dene wale purush bloggers ka samman aur pusho se bhidhne walli mahila bloggers ka chir haran dhekh sakti hai.

tanul thakur said...

Anup,
While your stance of not apologizing is appreciated and is really your prerogative. But, what upsets me is your condescending tone at the end of your comment. You bracket Kusum with "such hackers" which is certainly not acceptable. She was not "hacking". There is a difference between inquiring and hacking. So, please use words with care. Rebuttal disguised in form of labile is not a very good way of sorting problems that just arose from a silly misunderstanting!

Shardula said...

कुसुम दीदी, आप मुझे गौतम भईया के ब्लॉग के करण जानती हैं. ब्लॉग नहीं है मेरा, पर कभी कभी कवितायें लिखती हूँ इ-कविता में. आपके ब्लॉग पे इस तरह दुखभरे मन से आना होगा ये कभी न सोचा था. अनूप दा को मैं पिछले दो सालों से जानती हूँ. वो कितने अच्छे और नेक इंसान हैं इस बारे में बस इतना कहना ही काफी है कि मेरे लिए अनूप दा बड़े भाई जैसे हैं.
आज आपका ब्लॉग पढ़ के लगा कि एक छोटी सी कन्फ्यूशन जिसमें दोनों जनों की नीयत ठीक हो, कैसे विवाद को जन्म दे सकती है. मन दुखी हो गया! सबसे बुरा लगा उन Anonymus साहब या साहिबा का comment के रूप में यूँ किसी के नाम पे कीचड़ उछालना! उफ्फ्फ! How distasteful!
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@Tanul ji, I think it is you who is misconstruing what Anup da wrote to Kusum didi in his comment. He just meant such hackers as those who talk to him with other identities. He never put Kusum didi in same bracket.
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आशा करती हूँ इस दुःख भरे प्रकरण का शीघ्र ही अंत होगा.
सादर...शार्दुला

श्यामल सुमन said...

कुसुम जी,

पूरे घटनटक्रम को पढ़ा और आपसे उस दिन बात भी हुई थी। कहीं न कहीं कन्फ्यूजन ही है। मैं आपको भी जानता हूँ और अनूप भाई को २००४ से जबसे मैं इकविता का सदस्य बना। आपकी सज्जनता, सदाशयता और कर्मशीलता से तो परिचित हूँ ही, अनूप भाई भी बहुत ही नेक इन्सान हैं, मददगार और सही दिशा निर्देश देने वाले भी। मैं आजतक उनसे मिला तो नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि वो मेरे अपने हैं क्योंकि कई बार उन्होंने मेरी रचनाओं को सुधार कर नई दिशा और दशा दी है। उनके प्रति मेरे मन में श्रद्धा है। फिर भी पता नहीं कैसे यह दुखद वाकया हो गया। खैर--- इसे भूलकर क्यों न नई शुरूआत की जाय।

सादर
श्यामल सुमन

Raghunath Prasad रघुनाथ प्रसाद said...

कुसुम जी,

आपके इस पो्सट को पढकर इस दुखद घटना की जानकारी हुई। इन्टरनेट की दुनिया यूँ तो अच्छाईयों से भरीं हैं किन्तु बुराई भी कम नहीं। मेरे विचार से इसे भूलकर अपने रचनाकर्म में जुट जाएं।


सस्नेह
रघुनाथ प्रसाद
http://raghunathprasad.blogspot.com/

अनूप भार्गव said...

कुसुम जी ! आप का पत्र मिला । मैं आप की बात समझ सकता हूँ । मुझे आप से कोई शिकायत नही है । मैनें अपनी बात कह ही दी है , कुछ और नही कहना है ।
समीर ! धन्यवाद , मेरा ध्यान इस पोस्ट की ओर दिलाने के लिये ।
मानसी, ताऊ रामपुरिया जी, श्यामल भाई , शार्दुला ! आभारी हूँ आप सब के स्नेह का ।

Tanul ! Shardula has already replied to your comment. Once you figure out a way to distinguish between a hacker and inquirer , do let me know. Just remember ! I have every right to ask questions and not open my door to strangers. If I am logged in as me and someone see that I am logged in as him/her - It is not my problem and I have no way of knowing it.

शेष सब की टिप्पणियों के लिये इतना ही कह सकता हूँ कि अच्छा मनोरंजन हुआ । इस दुनिया में सिर्फ़ दो तरह के लोग है :
१. जो मुझे जानते हैं - मुझे उन से कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है ।
२. जो मुझे नहीं जानते हैं - मैं उन से कुछ कहने की ज़रूरत नहीं समझता ।

मैत्रेयी said...

यह प्रकरण केवल अज्ञान और भ्रम के कारण ही उत्पन्न हुआ है. यदि कोई आप का नाम प्रतुक्त करता हुआ आपसे सम्बोधित होता है तो स्पष्ट है कि वह कोई भी हो आप तो नहीं. ऐसी स्थिति में सावधानी बरतना आपका ही तो काम होना चाहिये. यह पूरा लेख अपनी असावधानी और अनभिज्ञता को दोषारोपण कर दूसरों के माथे गढ़ना ही प्रतीत होता है. किसी पर दोषारोपण से पूर्व आवश्यक है कि अपने को दर्पण में निहार लिया जाये.