मुझे मेरा बचपन लौटा दो


" मुझे मेरा बचपन लौटा दो "


मुझे मेरा बचपन लौटा दो ,
कदम्ब तो नहीं झूले पर झुला दो ।

याद नहीं माँ की थपकी ,
और न मधुमय तुतलाना ।
स्मरण नहीं वे लम्हें अब तो ,
उन लम्हों को शाश्वत ही बना दो ।
मुझे मेरा ...................... ।

परीकथा की परी समझ ख़ुद ,
आते होठों पर मुस्कान ।
मेरे मन के निश्चल भावों को ,
पल भर को ही पंख लगा दो ।
मुझे मेरा ................... ।

अभिमानी अंचल मे भर दो ,
विपुल भावनाओं का हार ।
भोलापन यदि हो ना सम्भव ,
चंचलता थोड़ा ही सिखा दो ।
मुझे मेरा .................... ।

-कुसुम ठाकुर -

7 comments:

M VERMA said...

मेरे मन के निश्चल भावों को ,
पल भर को ही पंख लगा दो ।
वाह क्या अभिलाषा है.
सुन्दर और सुखद रचना

Amar said...

Dil Chahta hai aaj phir chota ban jau,roz subah-subah chutti ke bahane banau or assembly mai aamkhe kholke ke preyer gau,wo class me chup-chupke tiffin kolu or pakde jane pe pet dard ka jhoot bolu ,din bhar school mai masti maru or bus mai juniors pe rob jhadu, woh har din homework adhura rah jaye aur agle din meri copy ghar pe reh jaye,her roz dosto se rooth jau per zindagi bher sath nibhane wala ek naya dost banau...dil chahta hai ki aaj phir chota ban jau ....

पी.सी.गोदियाल said...

अभिमानी अंचल मे भर दो ,
विपुल भावनाओं का हार ।
भोलापन यदि हो ना सम्भव ,
चंचलता थोड़ा ही सिखा दो ।
सुन्दर !

Dev said...

वाकई भावों और शब्दों की नयनाभिराम प्रस्तुति की है

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

याद नहीं माँ की थपकी ,
और न मधुमय तुतलाना ।
स्मरण नहीं वे लम्हें अब तो ,
उन लम्हों को शाश्वत ही बना दो ।
मुझे मेरा ....
वाह...वाह.....वाह.....
.....................


आपके पास कैसा दिमाग है ?...जाँचिये एक मिनट में......
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_26.html

रानीविशाल said...

याद नहीं माँ की थपकी ,
और न मधुमय तुतलाना ।
स्मरण नहीं वे लम्हें अब तो ,
उन लम्हों को शाश्वत ही बना दो ।

Waah bahut sundar va gahare bhav...behtreen rachana.

Udan Tashtari said...

काश!! लौट पाता..


उम्दा भाव!