हँसी के तले शिकन जो मिले

" हँसी के तले शिकन जो मिले "

मैं हँसती तो हूँ पर कहूँ मैं किसे
इस हँसी के तले शिकन जो मिले

कहूँ किस तरह दर्द के सिलसिले
दिखाऊँ किसे दर्द हैं जो मिले

न अरमानों की हसरत है मुझे
न दीवानगी न उल्फत ही मिले

हौसला है मिला उस सफ़र के लिए
मैं करूँ बंदगी पर सिफर ही मिले

- कुसुम ठाकुर -

19 comments:

Suman said...

कहूँ किस तरह दर्द के सिलसिले
दिखाऊँ किसे दर्द है जो मिले........nice

अनिल कान्त : said...

उम्दा रचना है.
यूँ ही आप लिखती रहेंगी इसी शुभकामना के साथ

महफूज़ अली said...

न अरमानों की हसरत है मुझे
न दीवानगी न उल्फत ही मिले...

बहुत सुंदर पंक्तियाँ....

ललित शर्मा said...

हौसला है मिला उस सफ़र के लिए
मैं करूँ बंदगी पर सिफर ही मिले

बंदगी के साथ चल पडे सिलसिले
हौसला जो है तो मंजिल भी मिले,



बेहतरीन रचना
शुभकामनाएं।

ह्रदय पुष्प said...

"हौसला है मिला उस सफ़र के लिए
मैं करूँ बंदगी पर सिफर ही मिले"
सार्थक और सराहनीय प्रयास
शुभकामनाएं

रंजना said...

WAAH......Lajawaab rachna !!!
sabhi sher lajawaab !!!

Anonymous said...

quite interesting post. I would love to follow you on twitter. By the way, did any one hear that some chinese hacker had busted twitter yesterday again.

Anonymous said...

interesting read. I would love to follow you on twitter. By the way, did any one learn that some chinese hacker had busted twitter yesterday again.

गिरीश पंकज said...

achchhe sher ban pade hai. badhai.

सर्वत एम० said...

मैं सिर्फ ऊपरी पंक्ति की बात करूंगा, आपने जो लिख दिया है, उस पर तो एक पूरा उपन्यास लिखा जा सकता है. आज के दौर की यही तो त्रासदी है, हम खोखली हंसी हंसते हैं, दूसरों की नजरों में खुद को जिंदा-सलामत दिखाते रहने की कोशिश में. जबकी एक एक पल, वक्त की एक एक हरकत हमें मजबूर करती रहती है आठों पहर रुलाने को. रिश्ते-नाते, दोस्ती-इंसानियत सब के चेहरे तो ज़ाहिर हो चुके हैं.
थोडा न्याय भी कीजिए अपने साथ. आप अपनी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर रही हैं. थोड़ी सी मेहनत आपको साहित्य में एक ऊंचा स्थान दिला सकती है. उसकी तमन्ना नहीं हैक्या?

हरकीरत ' हीर' said...

कहूँ किस तरह दर्द के सिलसिले
दिखाऊँ किसे दर्द है जो मिले....

sunder.....!!

psingh said...

बहुत सुन्दर भाव लिए सुन्दर रचना
बहुत बहुत आभार

मनकही said...

Bahut sundar... bahut gahree.... & man ko chhone vaali rachnaa. badhaai sweekaar karen kusum ji.

tulsibhai said...

" umda ....behtarin न अरमानों की हसरत है मुझे
न दीवानगी न उल्फत ही मिले... ..bahut hi badhiya "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

निर्मला कपिला said...

न अरमानों की हसरत है मुझे
न दीवानगी न उल्फत ही मिले...
वाह बहुत खूब सुन्दर रचना बधाई

Prabhakar said...

bahut khub........kya baat hai......

गौतम राजरिशी said...

अच्छी रचना दी। सर्वत जमाल साब की बातें काबिले-गौर हो दी....

Kusum Thakur said...

मैं अपने सभी साथियों का बहुत ही आभारी हूँ, आप सभी मुझे नई रचना के लिए उत्साह देते हैं, साथ ही प्रेरित भी करते हैं ....!!
सर्वत जी ,
आप जब भी मेरे ब्लॉग पर अपनी प्रतिक्रिया देते है दूने उत्साह से लिखती हूँ आपकी बातों का ख्याल अवश्य रखूंगी ....बहुत बहुत धन्यवाद !!

गौतम ,
अपने छोटे भाई की बातों का ख्याल तो रखना ही होगा !!

Karmanovsky Alexander P.O.Box 385 St.Petersburg 190000 Russia said...

Hi! Could you please send me via e-mail Photo a view from your windor with some words about this place.
Thank you,
regards
Alexander St.petersburg