ऐसा भी मन पावन देखा



ऐसा भी मन पावन देखा "

  कैसे कह दूँ ख्वाब न देखा
आज करूँ कैसे अनदेखा


न वो बातें, न वो रिश्ते
फिर भी लगता है मन देखा


तन्हाई भी साथ रहे जब
ऐसा क्यूँ लगता घन देखा


साथ चले थे बरसों पहले 
ऐसा भी मन पावन देखा


हरियाली का पता नहीं है
किस्मत से वह सावन देखा  


-कुसुम ठाकुर- 

7 comments:

श्यामल सुमन said...

बहुत खूब कुसुम जी - वाह क्या बात है?

शब्द-भाव का संगम यूँ कि
कुसुम हृदय का आँगन देखा
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
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http://meraayeena.blogspot.com/
http://maithilbhooshan.blogspot.com/

नव्या said...

न वो बातें, न वो रिश्ते
फिर भी लगता है मन देखा

कितने सुंदर मनोभाव प्रकट किये हैं आपकी लेखिनी ने.... वाह !

Pallavi said...

बहुत ही सुंदर भाव संयोजन ....

शिखा कौशिक said...

sarthak post aabhar .NAVSAMVATSAR KI HARDIK SHUBHKAMNAYEN !shradhey maa !

Shah Nawaz said...

वाह! बेहद सुन्दर भाव!

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

wah kusum jee...kaise kah doon khwab naa dekha...nahi kabhi mat kahiyega...sachin bhee to kahta hai har aadmi ko khwab jarur dekhna chahiye...sadar badhayee aaur apne blog par amantran ke sath

Sriram Roy said...

बहुत ही सुंदर भाव .............