Sunday, November 15, 2009

भड़ास

"भड़ास "


राज बाल की हिम्मत को
दिया चुनौती कईयों ने
पत्रकार तो पत्रकार
चिट्ठाकार भी कम नहीं
पत्रकारों ने बिक्री बढ़ाई
अखबार और पत्रिकाओं की
दूरदर्शन ने टी आर पी बढ़ाई
नेताओं के झूठे मंतव्यों से
फिर चिट्ठाकार क्यों पीछे रहें
हमने अपने चिट्ठों से
राज बाल के मंतव्यों के
बिना जड़ों को दिखाए हुए ही
सुशोभित किया अपने ब्लोगों को
कुछ चिट्ठाकार न रच पाए तो
उन्हें भी अफ़सोस नहीं
निकाल दिया अपनी भडास को
प्रतिक्रिया देकर चिट्ठों पर ।।

- कुसुम ठाकुर -