Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)

It's All About Me My Memories Experiences And journey

Wednesday, March 27, 2013

मन का भेद पपीहा खोले

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"मन का भेद पपीहा खोले" जिस माली ने सींचा अबतक सुबक सुबक वह रोता है पाल पोसकर बड़ा किया हो उसको एक दिन खोता है   धूप...
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Friday, March 15, 2013

आई शरण तुम्हारी

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" आई शरण तुम्हारी " हरि मैं तो हारी, आई शरण तुम्हारी, अब जाऊँ किधर तज शरण तुम्हारी ।   दर भी तुम्हारा लगे मुझको ...
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Friday, March 8, 2013

सही मायने में "महिला दिवस".कब मनेगा ?

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करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ ए...
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Monday, February 11, 2013

बर्फानी तूफ़ान नीमो के बाद जन जीवन.

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 बर्फ से ढके पेड़ पौधे   प्राकृतिक आपदा पर तो किसी का वश नहीं होता। परन्तु जब बच्चे या प्रिय जन साथ में न होकर हजारों मील दूर या द...
Saturday, January 26, 2013

मुझे आज मेरा वतन याद आया !!

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( मेरी एक पुरानी  कविता, जिसे मैं कुछ बरसों पहले अपने अमेरिका प्रवास के दौरान एक अप्रवासी भारतीय को ध्यान में रखकर लिखी थी। आज मैं अमेरिका...
Monday, January 14, 2013

सह सको मुमकिन नहीं.

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"सह सको मुमकिन नहीं"  है नशा ऐसी कहो क्या सह सको मुमकिन नहीं सो रहे क्यों अब तो जागो सह सको मुमकिन नहीं हाथ अब कुर्सी जो ...
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Saturday, August 18, 2012

आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है!!

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 "आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है उसके लिए हमारे देश के अनेको देश भक्तों ने जान की बाजी लगाकर देश पर मर मिटने की कसम खाई और शहीद ह...
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Friday, August 10, 2012

भाव कुसुम यह कैसे छुपाए.

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(आज जब मेरे पोते का जन्म हुआ है तब मैं समझ पाई हूँ कि लोग क्यों कहते हैं "मूल से सूद लोगों को ज्यादा प्यारा होता है". उद्गा...
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Friday, August 3, 2012

मेरा जीवन मेरी यात्रा.(दूसरी कड़ी)

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मुझे अपने बचपन की बहुत कम बातें ही याद हैं, पर कुछ बातें जिसे माँ बराबर दुहराती रहती थी और हमेशा सबको बताती थी, वह मानस पटल पर इस तरह बैठ ...
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Saturday, July 28, 2012

कहती है नैना हसूँ अब मैं कैसे.

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"कहती है नैना, हसूँ अब मैं कैसे" बयाँ हाले दिल का करूँ अब मैं कैसे खलिश को छुपाकर रहूँ अब मैं कैसे  बुझी कब ख्वाहि...
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Friday, July 20, 2012

मेरा जीवन मेरी यात्रा.(पहली कड़ी)

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किसी ने सच ही कहा है :"लेखन एक अनवरत यात्रा है  - जिसका न कोई अंत है न मंजिल ", और यह सच भी है। निरंतर अपने भावों को कलम बद्ध क...
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Friday, July 13, 2012

और एक प्यास है मन

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मेरी आज की रचना उस ख़ास व्यक्ति के लिए जिसने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं मन में आये भावों को आज शब्दों में अभिव्यक्त कर सकूँ . ...
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Thursday, June 21, 2012

हम कबतक क़ानून और न्यायपालिका को पूजते रहेंगे ?

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हमारे देश की न्याय पालिका कितनी निकम्मी है वह हम सबको मालूम है.  पैसा और ताकत के बलपर यहाँ कितने भी बड़े जुर्म से बाहर निकला जा सकता है.  ब...
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Wednesday, May 30, 2012

क्या पाया यह मत बोल !

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"क्या पाया यह मत बोल" कल-कल करती निशदिन नदियाँ, अंक में अपने भर लेती हैं, चाहे पत्थर हो या फूल, क्या पाया यह मत ...
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Thursday, May 17, 2012

उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है ?

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"उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है" जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ?   सज़ा मिले सत्कर्मों की  ...
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Wednesday, May 9, 2012

धोखा सगा दिया

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"धोखा सगा दिया" कसूर था क्या मेरा, फिर क्यूँ  सजा दिया सोई थी आस क्यों फिर, उसको जगा दिया  कहने को कुछ न था, सोहबत...
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Tuesday, April 17, 2012

वक्त भी कब वक्त देता

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"वक्त भी कब वक्त देता"  आज कहने को बहुत, जो अश्क में ही बह गए  अपनी खुशियाँ कह न पाऊँ, उलझनों में रह गए   गम को ...
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Tuesday, March 20, 2012

ऐसा भी मन पावन देखा

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"  ऐसा भी मन पावन देखा  "     कैसे कह दूँ ख्वाब न देखा आज करूँ कैसे अनदेखा न वो बातें, न वो रिश्ते फिर भी लगता है...
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Sunday, February 5, 2012

नैनो से बरसात क्यों

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(आज की रचना उस प्रिय व्यक्ति के लिए है जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं अपने भावों को लिख पाऊं) नैन से बरसात क्यों? **...
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Saturday, December 31, 2011

लोकतंत्र बीमार है

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 "लोकतंत्र बीमार है" लोकतंत्र बीमार अब, है जनता में रोष। इक दूजे पर थोपते, अपना अपना दोष।। बातें जन-हित की करें, स्व...
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