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मैं न उसमे बही सही
Posted by
Kusum Thakur
on Saturday, November 5, 2011
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मुक्तिका
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न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको
Posted by
Kusum Thakur
on Saturday, June 5, 2010
Labels:
मुक्तिका
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"न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको"
न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको
न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको
फिर कैसी ये प्रीत, बतलाऊँ किसको?
लगी कैसी लगन, रहूँ मैं यूँ मगन
धरूँ ध्यान किसीका , पाऊँ मैं तुझको
क्या है तुम में वो, बात जपूँ दिन रात
कहूँ कैसे न मैं, समझूँ मैं तुमको
कहो तुम जो वही, लगे मुझको सही
क्यों न करूँ विश्वास, है अगन मुझको
मिला जब से है मीत, रुचे सब रीत
देखूँ उसे भी न तो, जँचे उसको
- कुसुम ठाकुर -
क्या है तुम में वो, बात जपूँ दिन रात
कहूँ कैसे न मैं, समझूँ मैं तुमको
कहो तुम जो वही, लगे मुझको सही
क्यों न करूँ विश्वास, है अगन मुझको
मिला जब से है मीत, रुचे सब रीत
देखूँ उसे भी न तो, जँचे उसको
- कुसुम ठाकुर -
मिले तुमको ख़ुशी यही मन में सदा
Posted by
Kusum Thakur
on Sunday, May 30, 2010
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मुक्तिका
12
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(आज मेरे लिए एक विशेष दिन है . मन में कुछ बातें आईं, सोची शब्दों में पिरो दूँ. )
"मिले तुमको ख़ुशी यही मन में सदा "
हो तो दूर मगर लगे पास यदा
हर ख़ुशी जो मिले यह आशीष सदा
है कचोट कहूँ जो मैं हूँ न वहाँ
है वो बात कहाँ जो कहूँ मैं यदा
धरूँ धीर सदा फिर न पीर कमा
लगे कुछ न सही यही रीत बदा
तप ज्यों मैं करूँ रहे क्यों न भला
यही मन में मेरे है जो बात सदा
कहूँ कुछ न भला लगे राज बला
मिले तुमको ख़ुशी यही मन में सदा
- कुसुम ठाकुर -
