"सारे वादों को मैं भूल जाऊँ सही "
सारे वादों को मैं भूल जाऊँ सही
और कसमों को दिल से मिटाऊँ सही
एक तुम ही सदा रहनुमा थे मेरे
सारे मंज़र को दिल में उतारूँ सही
आइना भी मुझे अब लगे बदनुमा
चाहे लाख मैं खुद को सवारूँ सही
आहट भी मुझे अब लगे खौफ सा
सच्चाई गले से लगाऊँ सही
अब दरख्तों की छावों तले न सुकून
जो मैं बैठी हूँ कैसे बताऊँ सही
इल्तजा भी करुँ तो अब कैसे करूँ
कैसे ढूँढूँ जो मिल पाऊँ सही
इल्तजा भी करुँ तो अब कैसे करूँ
कैसे ढूँढूँ जो मिल पाऊँ सही
- कुसुम ठाकुर -
शब्दार्थ :
रहनुमा - पथ प्रदर्शक , मार्ग दर्शक
बदनुमा - कुरूप, भद्दा , जो देखने में अच्छा न हो
दरख्तों - पेड़
इल्तजा - प्रार्थना , विनय , निवेदन
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